Tum Satguru Ke Pass | Radha Soami Quotes

Radha Soami Quotes

Radha Soami Quotes : सन्त महापुरुष फरमाते हैं कि तुम सतगुरू के पास पहुंचते ही कहां हो ?

तुम तो मंदिर, मस्जिद या गुरूद्वारे में भी नहीं पंहुच पाते ।
तुम भगवान के घर जाते और झुकते जरूर हो । लेकिन तुम्हारा जाना और झुकना सिवाय अभिनय के और कुछ नहीं होता । क्योंकि जो एक बार झुका वह सदा के लिए भर जाता है, निहाल हो जाता है । लेकिन तुम तो अनेक बार झुक कर भी खाली के खाली लौट आते हो ।

कभी गौर से देखना तुम्हारा शरीर ही झुकता है, अंहकार तो खङा ही रहता है । अंहकार की क्रीज तुम टूटने ही नहीं देते हो । मंदिर में जाकर हाथ जोङ कर सिर को झुकाना तुम्हारे शरीर का कार्य है । इसके साथ अहम अहंकार तो सीना तान कर खङा होता है । मंदिर में तुम अकेले बैठे हो तो बङे आराम से धीरे धीरे भजन बोलते हो । चार आदमीं और खङे हों तो तुम बङी ऊंची आवाज में चिलाते हो कि देखो मैं कितना बङा श्रद्धालु हूं ।

तुम धर्म का काम भी बङी अकङ से करते हो क्योंकि धार्मिक आदमीं में अकङ बङी जल्दी प्रवेश करती है । लेकिन ध्यान रखना कि जहां अहंकार भरता हो वहां धर्म का कोई संस्पृश नहीं हो सकता । वहां दिखावा हुया करता है ।
धर्म तो वहीं जुङता है जहां “मैं” मिटता है । तुम्हारा व्रत उपवास इस “मैं” को मिटादे तो वह सार्थक समझो अन्यथा नहीं । तुम्हारे मंदिर जाने से तुम में यदि विनम्रता आ जाए तो भक्ति सार्थक है अन्यथा नहीं । क्योंकि भगवान को सदा सरल व विनम्र लोग ही पसंद होते हैं प्रदर्शनकारी नहीं ।

तुम्हारी विडम्बना ही यही है कि तुम भगवान की भक्ति और सुमिरन करने में भी सबसे ज्यादा प्रदर्शन करते हो । अपनी वास्तविक सरलता व सहजता से बाहर निकल कर अभिनय करने में जुट जाते हो । जबकि सतगुरू कहते हैं कि बंदे तू ज्योति स्वरूप हैं ले अपना रूप पहचान ।।

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